Saturday, March 30, 2013

'अपने इस मानव जीवन को परोपकार में लगाओ'

नई दिल्ली।। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा पीतमपुरा आश्रम में सत्संग के अवसर पर स्वामी नरेन्द्रानन्द ने कहा कि शिव सदा और सर्वत्र कल्याणकारी हैं। उनका प्रत्येक स्वरूप और श्रृंगार हमें एक महान संदेश देता है। उन्हें त्रिनेत्र धारी कहा गया। उसी प्रकार हम सबके मस्तक पर भी एक तीसरा नेत्र है जो जीवन पर्यंत बंद रहता है। भगवान शंकर का जागृत तीसरा नेत्र मानव को प्रेरित करता है कि हम भी एक पूर्ण गुरु की शरण में जाकर अपना शिव नेत्र जागृत करें। जब हमारा यह नेत्र खुलेगा तभी हम ब्रह्मा सत्य का साक्षात्कार कर पाएंगे। ईश्वर के दर्शन कर पाएंगे।

श्री सनातन धर्म सभा लाल मंदिर, ईस्ट पटेल नगर में भागवत गीता पर प्रवचन करते हुए स्वामी मुकुन्दानन्द ने कहा कि संतों के मुख से भगवान के नाम गुणादि की चर्चा सुनने से हृदय की गंदगी धुलती है और हृदय स्वच्छ होने लगता है। किंतु सुनने मात्र से काम नहीं चलेगा। उस ज्ञान को आचरण में लाना है। ज्ञान का सोपान मनन है, यह भी जरूरी है और फिर अंत में तीसरे सोपान में उस ज्ञान पर विश्वास करना भी आवश्यक है।

महागौरी मंदिर, डी ब्लॉक खजूरी खास में सत्संग के अवसर पर पंडित भोलादत्त पांडे ने कहा कि यह मानव चोला हमें बड़े सौभाग्य से मिला है। हमें इस मानव जीवन को व्यर्थ ही नहीं खोना है। इसे परोपकार में लगाकर ही आत्म कल्याण किया जा सकता है। ऐसा अवसर दुबारा मिलने वाला नहीं है।
http://navbharattimes.indiatimes.com/-/holy-discourse/-/invest-your-life-in-charity/articleshow/18984527.cms

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